Central Board of Film Certification

 

                 आज कल भारत में फिल्मो की रिलीज से पहेले न्यूज़ अखबारों, टी.वी. ख़ास तोर पर सोसल नेटवर्क साइट्स पर फिल्म के निर्माता, निर्देशकों अदाकारों के अलावा एक और नाम बार-बार ज्यादा चर्चा मे आ रहा है वह है सेंसर बोर्ड|

तो चलिए जानते है क्या है ये सेंसर बोर्ड ..??

 

 

 

                       भारत मैं सबसे पहेले सिनेमा 1896 में ल्यूमियर ब्रदर्स द्वारा लाया गया | बॉम्बे में वाटसन होटल में पहला शो प्रस्तुत किया | इतिहास में ल्यूमियर ब्रदर्स ही सबसे पहले फिल्म निर्माता थे।

भारत में पहली फिल्म  राजा हरिश्चंद्र, 1913  में दादासाहेब फाल्के द्वारा बनाई गई। इस समय के आसपास ही, भारतीय सिनेमैटोग्राफ अधिनियम पारित किया गया लेकिन यह 1920 में लागू हुआ। उस समय के सेंसर बोर्ड विभिन्न शहरों में पुलिस प्रमुखों के नियंत्रण में था | मद्रासबॉम्बेकलकत्तालाहौर (पाकिस्तान)रंगून (म्यांमार )। क्षेत्रीय सेंसर को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दी गई थी |

1947 में हिन्दुस्तान कि आज़ादी के बादसिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 को लागू किया गया जिसे  क्षेत्रीय सेंसर बोर्ड का अधिकार समाप्त दिया गया और उन्हें बॉम्बे बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर के तहत एकजुट कर किया गया। 1983  में सिनेमेटोग्राफ (प्रमाणन) नियमों को संशोधित किया गया और उसके बाद से इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड CBFC के रूप में जाना जाने लगा।

 

 

सेंसर बोर्ड CBFC के कार्य

केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड  या भारतीय सेंसर बोर्ड का प्रमुख काम  भारत में फिल्मोंटीवी धारावाहिकोंटीवी विज्ञापनों और विभिन्न दृश्य सामग्री की समीक्षा ओर सार्वजनिक प्रदर्शन का नियंत्रण करना है। यह भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन है ।  प्रमाणन प्रक्रिया सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952, सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 1983, और केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार कार्य करता है। 2004 के बाद सेसेंसरशिप के कार्यो को कठोरता से लागू किया गया है। भारत में कोई भी फिल्म सेंसर बोर्ड CBFC से प्रमाणित किया जाने के बाद ही देश में प्रदर्शित की जा सकती है|

 

 

सेंसर बोर्ड CBFC के सदस्य                                                              

सेंसर बोर्ड में 25 अन्य गैर-सरकारी सदस्य और एक अध्यक्ष (जिनमें से सभी को केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है) होते है | प्रसून जोशी को 11 अगस्त 2017 को बोर्ड के 28 वें अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सलाहकार पैनल फिल्मों की परीक्षा में क्षेत्रीय कार्यालयों की मदद करते हैं। सलाहकार पैनलों में  विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य शामिल होते हैं जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा दो साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। यह सदस्य समाज के अलग अलग क्षेत्रों का प्रतिनिदित्व करते है, जैसे सामाजिक विज्ञान, शिक्षा ,कला, आदि |

सेंसर बोर्ड, मुम्बई में अपने मुख्यालय से कार्य करता है | इसके अलावा भारत में नौ क्षेत्रीय कार्यालय हैं:

बैंगलोर ,चेन्नई ,कटक ,गुवाहाटी ,हैदराबाद ,कोलकाता ,मुंबई ,नई दिल्ली ,तिरुवनंतपुरम

 

 

 

फिल्म प्रमाणीकरण

प्रमाणन प्रक्रिया को आम तौर पर बहुत पारदर्शी रखा जाता है। कोई भी फिल्म चाहे विदेशी या भारतीय हो उसे CBFC द्वारा प्रमाणित होना जरुरी है CBFC की प्रामाणिकता न होने से पहले फिल्म का प्रदेशन नहीं किया जा सकता |

सेंसर बोर्ड का प्राथमिक कार्य प्रत्येक फिल्म को चार श्रेणियों में से किसी एक को प्रदान करना है

 

                  ·        यू / U - अप्रतिबंधित सार्वजनिक प्रदर्शन  (Unrestricted Public Exhibition) इन               फिल्मों को सभी आयु वर्ग के व्यक्ति देख सकते हैं।

 

 

                 ·        ए /A - वयस्कों के लिए प्रतिबंधित (Restricted to adults)  यह वह श्रेणी है जिसके           लिए सिर्फ वयस्क यानि 18 साल या उससे अधिक उम्र वाले व्यक्ति ही पात्र हैं।

 

 

     जून 1983 में U/A तथा S वर्ग को शामिल किया गया था |

 

·       अ/व अथवा U/A - अप्रतिबंधित सार्वजनिक प्रदर्शन (सावधानी के एक शब्द के साथ जो 12 वर्ष से कम के बच्चों के लिए अभिभावकीय विवेक आवश्यक)

 

·   वि (विशेष)  अथवा S / एस - किसी विशेष वर्ग के व्यक्तियों को प्रतिबंधित (उदाहरण के लिए: इंजीनियर्स, डॉक्टर, वैज्ञानिक, आदि)

 

इसके अतिरिक्त,  वी / यू  (V/U) ,  वी / यूए (V/UA)  , वी / ए (V/A)  का प्रयोग यू (U) ,  यू / ए ( U/A) और ए (A)के साथ वीडियो रिलीज के लिए किया जाता है।

 



 

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